भारत में पिछले 24 घंटे में नए COVID-19 केसों में 20 फीसदी से ज़्यादा कमी आई है.पिछले 24 घंटे में 28, 204 मामले सामने आए और 373 लोगों की मौत हुई है. इससे कोरोना के कुल मामले 31,998, 158 हो गए हैं. वहीं कोरोना के सक्रिय मामलों की बात करें तो उनकी संख्या 388,508 है. सक्रिय मामलों की तादाद चार लाख से कम हो गई है. पिछले 24 घंटे में 41, 511 लोग ठीक हुए हैं.  देश में कोरोना से कुल मौतों की बात करें तो उनकी संख्या 428, 682 है.  पिछले 24 घंटे में वैक्सीन की  54,91,647 डोज लगीं. अब तक वैक्सीन की 51,45,00,268 डोज लगी हैं. रिकवरी रेट अभी तक की सबसे ज्यादा 97.45%  है. देश में अभी तक कोरोना से 3,11,80,968 लोग ठीक हो चुके हैं. वीकली पोजिटिविटी रेट भी 5 प्रतिशत से नीचे 2.36 प्रतिशत है. डेली पोजिटिविटी रेट भी  1.87% है जो कि पिछले 15 दिनों से 3 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है.

बता दें कि केंद्र सरकार ने भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की कोरोना संक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़ा फैसला किया है. सरकार ने फैसला किया है कि अब विदेशी नागरिक भी भारत में कोरोना वैक्सीन लगवा सकेंगे. भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों को COVID-19 वैक्सीन लेने के लिए CoWin पोर्टल पर पंजीकृत होने की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है. अब विदेशी नागरिक जो भारत में रह रहे हैं कि वो CoWIN पोर्टल पर पंजीकरण के मकसद से अपने पासपोर्ट को पहचान दस्तावेज के रूप में उपयोग कर सकते हैं. एक बार जब वो इस पोर्टल पर पंजीकृत हो जाएंगे, तो उन्हें टीकाकरण के लिए एक स्लॉट मिल जाएगा. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भारत में रह रहे हैं, खास तौर पर महानगरों में. इन क्षेत्रों में ज्यादा जनसंख्या घनत्व की वजह से कोरोना संक्रमण के फैलने की संभावना ज्यादा है. ऐसी घटना की किसी भी संभावना का मुकाबला करने के लिए, सभी पात्र व्यक्तियों का टीकाकरण करना महत्वपूर्ण है. ये पहल भारत में रहने वाले विदेशी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.

कोरोना की देश में तैयार दो वैक्सीनों कोविशील्ड और कोवैक्सीन  के मिश्रण ने बेहतर परिणाम दिए हैं. इससे ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता मिली है. मेडिकल संस्था आईसीएमआर की रिपोर्ट में यह सामने आया है. यह अध्ययन यूपी के सिद्धार्थनगर  में उन लोगों पर की गई, जिन्हें गलती से कोविशील्ड की पहली वैक्सीन के बाद दूसरी डोज के तौर पर कोवैक्सीन दे दी गई थी. तब इस प्रकरण को लेकर काफी होहल्ला मचा था. हालांकि मेडिकल संस्था ने इस पर आगे और अध्ययन की वकालत की है.

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